
जावरा–क्षेत्र में धर्म की बयार बहाने के लिए सरतलिया बंधुओं ने लगभग दस बीघा जमीन में खड़ी गेहूं की लहलहाती फसल ही कटवा दी। अब वहां प्रसिद्ध सन्त श्री कमलकिशोर जी नागर के प्रवचनों का धर्मालु रसपान करेंगे। जी हां, यह बिलकुल सही बात है। महू-नीमच रोड़ के नजदीक हिंगलाज माता मंदिर के समीप इसी माह की 24 तारीख से ख्यात गोसेवक सन्त श्री कमलकिशोर जी नागर की कथा का आयोजन होना है। इसके लिए पंडित जी के भक्त व अनुयायी यहां तैयारियां करने में जुट गए हैं। बता दें कि आसपास की धर्मप्रेमी जनता के साथ ही दूर-दूर के भक्त सन्त श्री कमल किशोर जी नागर के अमृत रूपी प्रवचन सुनने का अवसर तलाशते रहते हैं। उनके बड़ी संख्या में पहुंचने के चलते पर्याप्त जगह में पांडाल लगाने हेतु आयोजन समिति प्रयासरत है। इसके लिए भक्तों रामचन्द्र सरतलिया व पंकज सरतलिया ने करीबन 10 बीघा भूमि पर लहलहाती गेहूं की फसल को समय से पहले ही कटवा कर जमीन को व्यवस्थित करने का काम प्रारम्भ कर दिया है। यहां भक्तों के कथा श्रवण करने हेतु बैठने की उचित व्यवस्था की जा रही है। याने विशाल पांडाल बनाया जा रहा है। हालांकि सरतलिया बंधुओं द्वारा जिसने गेहूं की फसल बोई थी, उस किसान को उसकी मेहनत और अनुमानित गेहूं की कीमत चुका दी गई है।
खास बात यह रही कि कृषक को गेहूं की फसल की राशि चुकाने के साथ ही मजदूरों को पैसे देकर फसल की कटाई कराई गई और उसे ट्रक में भरवाया गया। वहीं कटी हुई गेहूं की फसल को गोग्रास हेतु विभिन्न गौशालाओं तक पहुंचाया गया। कथा आयोजन समिति प्रमुख रामचन्द्र सरतलिया के अनुसार सन्त श्री के प्रवचन सुनने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तमाम व्यवस्था की जा रही है।
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जावरा–क्षेत्र में धर्म की बयार बहाने के लिए सरतलिया बंधुओं ने लगभग दस बीघा जमीन में खड़ी गेहूं की लहलहाती फसल ही कटवा दी। अब वहां प्रसिद्ध सन्त श्री कमलकिशोर जी नागर के प्रवचनों का धर्मालु रसपान करेंगे। जी हां, यह बिलकुल सही बात है। महू-नीमच रोड़ के नजदीक हिंगलाज माता मंदिर के समीप इसी माह की 24 तारीख से ख्यात गोसेवक सन्त श्री कमलकिशोर जी नागर की कथा का आयोजन होना है। इसके लिए पंडित जी के भक्त व अनुयायी यहां तैयारियां करने में जुट गए हैं। बता दें कि आसपास की धर्मप्रेमी जनता के साथ ही दूर-दूर के भक्त सन्त श्री कमल किशोर जी नागर के अमृत रूपी प्रवचन सुनने का अवसर तलाशते रहते हैं। उनके बड़ी संख्या में पहुंचने के चलते पर्याप्त जगह में पांडाल लगाने हेतु आयोजन समिति प्रयासरत है। इसके लिए भक्तों रामचन्द्र सरतलिया व पंकज सरतलिया ने करीबन 10 बीघा भूमि पर लहलहाती गेहूं की फसल को समय से पहले ही कटवा कर जमीन को व्यवस्थित करने का काम प्रारम्भ कर दिया है। यहां भक्तों के कथा श्रवण करने हेतु बैठने की उचित व्यवस्था की जा रही है। याने विशाल पांडाल बनाया जा रहा है। हालांकि सरतलिया बंधुओं द्वारा जिसने गेहूं की फसल बोई थी, उस किसान को उसकी मेहनत और अनुमानित गेहूं की कीमत चुका दी गई है।
खास बात यह रही कि कृषक को गेहूं की फसल की राशि चुकाने के साथ ही मजदूरों को पैसे देकर फसल की कटाई कराई गई और उसे ट्रक में भरवाया गया। वहीं कटी हुई गेहूं की फसल को गोग्रास हेतु विभिन्न गौशालाओं तक पहुंचाया गया। कथा आयोजन समिति प्रमुख रामचन्द्र सरतलिया के अनुसार सन्त श्री के प्रवचन सुनने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तमाम व्यवस्था की जा रही है।




